’लखपति दीदी अभियान से बदल रही गांवों की तस्वीर’

’बिरौरीडांड और पिपरडांड तेजी से बढ़ रहे हैं ‘लखपति ग्राम’ बनने की ओर’
कोरिया 18 जून 2026/ राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत संचालित लखपति दीदी अभियान जिले के विकासखंड सोनहत के ग्राम बिरौरीडांड और पिपरडांड में ग्रामीण आर्थिक सशक्तिकरण की नई इबारत लिख रहा है। ग्राम पंचायत कुशहा के अंतर्गत आने वाले ये दोनों गांव आज महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता के सफल मॉडल के रूप में उभर रहे हैं। स्व-सहायता समूहों से जुड़कर महिलाओं ने विभिन्न आजीविका गतिविधियों को अपनाया है, जिसके परिणामस्वरूप दोनों गांव अब लखपति ग्राम बनने की दिशा में तेजी से अग्रसर हैं। ग्रामीण परिवारों की महिलाओं की आय बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से संचालित लखपति दीदी अभियान का लक्ष्य प्रत्येक ग्रामीण महिला की वार्षिक आय एक लाख रुपये या उससे अधिक करना है। इसी उद्देश्य को लेकर बिरौरीडांड और पिपरडांड में योजनाबद्ध तरीके से कार्य किया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं।
ग्राम बिरौरीडांड में कुल 48 परिवार निवासरत हैं, जिनमें से 44 परिवारों की वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक हो चुकी है। वहीं ग्राम पिपरडांड में कुल 38 परिवार हैं, जिनमें से 32 परिवारों ने एक लाख रुपये वार्षिक आय का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। इस प्रकार दोनों गांवों के लगभग 90 प्रतिशत से अधिक परिवार लखपति दीदी अभियान के दायरे में आ चुके हैं।
इन गांवों की महिलाएं स्व-सहायता समूहों के माध्यम से नियमित बचत कर रही हैं तथा समूहों से ऋण प्राप्त कर विभिन्न आयवर्धक गतिविधियों का संचालन कर रही हैं।महिलाओं ने एकल आजीविका के बजाय बहुआयामी आजीविका मॉडल को अपनाया है, जिससे उनकी आय में निरंतर वृद्धि हो रही है। कृषि आधारित गतिविधियों में सब्जी उत्पादन, दो फसली खेती, पाम प्लांटेशन, शहद उत्पादन, बकरी पालन, मुर्गी पालन, पशुपालन एवं मत्स्य पालन शामिल हैं। वहीं गैर-कृषि क्षेत्र में सिलाई केंद्र, किराना दुकान, आटा चक्की, राइस मिल एवं अन्य लघु व्यवसायों का संचालन किया जा रहा है।
गांव की कई महिलाएं आज ‘लखपति दीदी‘ के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुकी हैं। इनमें लीलावती, मंगली, रामबाई, नानी बाई, कुसुम, सुनीता, जयकुमारी, कुमुद धुर्वे, कौशल्या मीना, कल्पलता राजमणि और सुमित्रा सहित अनेक महिलाएं शामिल हैं। इन महिलाओं ने कृषि, पशुपालन, शहद उत्पादन, मत्स्य पालन और स्वरोजगार गतिविधियों को एक साथ अपनाकर अपनी वार्षिक आय एक लाख रुपये से अधिक तक पहुंचाई है।
लखपति दीदी अभियान की एक महत्वपूर्ण विशेषता महिलाओं की आय का वैज्ञानिक मूल्यांकन है। भारत सरकार के द्वारा तय पोर्टल के माध्यम से संचालित गतिविधियों में होने वाले व्यय एवं लाभ का त्रैमासिक मूल्यांकन किया जाता है, जिससे वास्तविक आय का आकलन संभव हो पाता है। ग्राम स्तर पर नियुक्त लखपति स्रोत व्यक्ति परिवारों की आय का सत्यापन, गतिविधियों की निगरानी तथा पोर्टल में जानकारी दर्ज करने का कार्य कर रहे हैं।
इन गांवों की सफलता के पीछे विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी अभिसरण की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। जिला प्रशासन ने विभिन्न विभागीय योजनाओं को एकीकृत कर महिलाओं को अधिकतम लाभ उपलब्ध कराया है। कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा शहद उत्पादन का प्रशिक्षण एवं तकनीकी सहयोग प्रदान किया गया, जबकि उद्यानिकी विभाग ने पाम प्लांटेशन के लिए पौधे उपलब्ध कराए। कृषि विभाग द्वारा किसान क्रेडिट कार्ड, उन्नत बीज एवं तकनीकी सहायता दी गई। मत्स्य विभाग ने मछली बीज एवं जाल उपलब्ध कराए तथा क्रेडा विभाग ने सौर ऊर्जा संचालित पंप प्रदान किए, जिससे सिंचाई सुविधाओं का विस्तार हुआ।
इसके अतिरिक्त प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत पात्र परिवारों को आवास उपलब्ध कराए गए। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के माध्यम से शेड निर्माण, डबरी निर्माण एवं अन्य आधारभूत संरचनाओं का विकास किया गया, जिससे महिलाओं की आजीविका गतिविधियों को स्थायित्व मिला।
इन समन्वित प्रयासों का परिणाम यह है कि आज दोनों गांवों के अधिकांश परिवार आर्थिक रूप से सशक्त हो चुके हैं। महिलाओं की आय में वृद्धि होने से बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में सुधार हुआ है। महिलाएं अब परिवार के आर्थिक निर्णयों में सक्रिय भागीदारी निभा रही हैं और आत्मविश्वास के साथ अपने व्यवसायों का संचालन कर रही हैं।
वर्तमान में दोनों गांवों के 90 प्रतिशत से अधिक परिवार लखपति दीदी की श्रेणी में पहुंच चुके हैं। जिला प्रशासन एवं बिहान मिशन के सतत प्रयासों से शेष परिवारों को भी विभिन्न आयवर्धक गतिविधियों से जोड़ा जा रहा है। उम्मीद है कि निकट भविष्य में दोनों गांव 100 प्रतिशत लखपति परिवारों वाले ग्राम के रूप में स्थापित होंगे।