मन की बात में प्रधानमंत्री ने गर्मी, खेल, संस्कृति और विज्ञान पर रखे विचार
विधायक ने कार्यकर्ताओं के साथ सुना 134वां एपिसोड
महासमुंद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 134वें एपिसोड का प्रसारण रविवार को देशभर में किया गया। महासमुंद विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने बूथ क्रमांक-215, बीटीआई शक्ति केंद्र स्थित विधायक कार्यालय में भाजपा कार्यकर्ताओं के साथ कार्यक्रम का श्रवण किया।
इस अवसर पर भाजपा मंडल महामंत्री अग्रज शर्मा, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष अमन वर्मा, भाजपा नेता प्रकाश शर्मा, नंदू जलक्षत्री, चुनेश्वरी साहू, रामेश्वर पटवा, सुरेश साहू और गोपी कन्नौजे सहित अन्य कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने पहले कार्यकाल से लगातार प्रत्येक माह ‘मन की बात’ के माध्यम से देशवासियों से संवाद कर रहे हैं। इस कार्यक्रम में वे देश के विभिन्न क्षेत्रों, उपलब्धियों और प्रेरणादायी विषयों को लोगों के सामने रखते हैं।
गर्मी से राहत के लिए देशी पेय पदार्थों का किया उल्लेख
कार्यक्रम की शुरुआत में प्रधानमंत्री ने देश में पड़ रही भीषण गर्मी का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारतीय परंपराओं में गर्मी से बचाव के कई उपाय हमारी रसोई और खानपान संस्कृति में मौजूद हैं। उन्होंने विभिन्न राज्यों में प्रचलित पारंपरिक एवं देशी पेय पदार्थों का उल्लेख करते हुए उनके महत्व को रेखांकित किया। साथ ही देश के अलग-अलग हिस्सों में पाए जाने वाले आम की विभिन्न प्रजातियों और उनकी विशेषताओं पर भी चर्चा की।
100 मीटर दौड़ में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाने वाले खिलाड़ियों की सराहना
प्रधानमंत्री मोदी ने देश के दो चर्चित एथलीट गुरिंदरवीर सिंह और अनिमेष कुजूर की उपलब्धियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि 100 मीटर दौड़ का एक इवेंट इन दिनों पूरे देश में चर्चा का विषय बना हुआ है। महज दो दिनों के भीतर पुरुषों की 100 मीटर दौड़ में राष्ट्रीय रिकॉर्ड तीन बार टूटा। प्रधानमंत्री ने दोनों खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए इसे भारतीय खेल जगत के लिए गौरवपूर्ण उपलब्धि बताया।
चोलकालीन ताम्र पट्टिकाओं की भारत वापसी का किया जिक्र
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने नीदरलैंड दौरे का उल्लेख करते हुए बताया कि वहां आयोजित एक विशेष समारोह में चोल काल की प्राचीन ताम्र पट्टिकाएं भारत को वापस सौंपी गई हैं। इनमें 21 बड़ी और तीन छोटी ताम्र पट्टिकाएं शामिल हैं। उन्होंने बताया कि ये पट्टिकाएं मुख्य रूप से राजा राजेंद्र चोल प्रथम द्वारा अपने पिता राजा राजराजा चोल के एक वचन को पूरा करने से संबंधित हैं। इनमें चोल वंश की उपलब्धियों का भी विस्तृत वर्णन मिलता है। विशेषज्ञों के अनुसार ये ताम्र पट्टिकाएं एक हजार वर्ष से अधिक पुरानी हैं तथा प्राचीन ब्राह्मी लिपि और पाली भाषा में लिखी गई हैं।
खगोल विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र की प्रेरक पहल का भी उल्लेख
प्रधानमंत्री ने भारतीयों में खगोल विज्ञान (एस्ट्रोनॉमी) के प्रति बढ़ती रुचि की चर्चा करते हुए वैज्ञानिक सोच को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया। इसके साथ ही उन्होंने तमिलनाडु के नागरकोइल में हुई अपनी मुलाकात का उल्लेख करते हुए शिक्षाविद् गिरिजा अम्मा के कार्यों की सराहना की। उन्होंने बताया कि गिरिजा अम्मा करीब 15 स्कूलों का संचालन करती हैं, जिनमें चेन्नई का जयगोपाल गरोडिया हिन्दू विद्यालय प्रमुख है। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी देशभक्ति और समाजसेवा की भावना प्रत्येक भारतीय के लिए प्रेरणास्रोत है। उन्होंने ‘मन की बात’ से प्रेरित होकर देश के सैनिकों के लिए योगदान देने का संकल्प भी लिया है।
विधायक योगेश्वर राजू सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री के विचार समाज में सकारात्मक बदलाव, राष्ट्र निर्माण और जनभागीदारी की भावना को मजबूत करने का कार्य करते हैं। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित कार्यकर्ताओं ने भी प्रधानमंत्री के संदेशों को प्रेरणादायी बताया।
