भू-जल संवर्धन की दिशा में बड़ा कदम, एक दिवसीय कार्यशाला संपन्न
बिलासपुर, 21 अप्रैल 2026/कलेक्टर संजय अग्रवाल एवं सीईओ जिला पंचायत संदीप अग्रवाल के मार्गदर्शन में जल जीवन मिशन अंतर्गत ग्रामीण जल आपूर्ति स्रोतों की स्थायित्व सुनिश्चित करने हेतु भू-जल संवर्धन एवं एक्विफर पुनर्भरण तकनीकों पर एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं कार्यशाला का आयोजन विकासखंड मस्तूरी में किया गया। प्रशिक्षण में वरिष्ठ वैज्ञानिक बी. अभिषेक, कार्यपालन अभियंता, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग रूपेश धनंजय एवं एपीओ जिला पंचायत श्रीमती अनुराधा मिश्रा द्वारा तकनीकी मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में जिले के सभी जनपद पंचायतों के सीईओ, सहायक अभियंता एवं उप अभियंताओं ने भाग लिया तथा एक्विफर रिचार्ज एवं जल स्रोत पुनर्भरण की उन्नत तकनीकों को समझा। प्रशिक्षण के अंतर्गत टीम द्वारा तीन ग्रामों में स्थल निरीक्षण कर लाइव डेमो किया गया। निरीक्षण के दौरान ग्राम सरगांव में स्थित एक बड़े तालाब के अपस्ट्रीम क्षेत्र में जल उपलब्ध था। टीम द्वारा तालाब के डाउनस्ट्रीम स्थित पेयजल स्रोत (ट्यूबवेल) का निरीक्षण किया गया। भू-वैज्ञानिक अध्ययन के आधार पर तालाब के अपस्ट्रीम में फ्रैक्चर, फॉल्ट लाइन चिन्हित की गई, जहां वर्षा जल एवं बांध का पानी प्रवेश करता है। उक्त स्थान पर इंजेक्शन वेल स्थापित करने हेतु उपयुक्त साइट चयनित किया गया, जिससे सीधे एक्विफर में जल पुनर्भरण होकर डाउनस्ट्रीम स्थित पेयजल स्रोतों को सुदृढ़ किया जा सके। मस्तुरी के ग्राम जयरामनगर में स्थित दो तालाबों के निरीक्षण के दौरान ऊपरी तालाब सूखा एवं निचला तालाब निस्तारी उपयोग में पाया गया। ग्राम सरपंच द्वारा बताया गया कि ऊपरी तालाब के भरने पर सभी पेयजल स्रोत सुचारू रूप से चलते हैं। इस पर वरिष्ठ वैज्ञानिक अभिषेक ने बताया कि ऊपरी तालाब स्वयं एक परकोलेशन टैंक की तरह कार्य करता है, अतः यहां इंजेक्शन वेल की आवश्यकता नहीं है। ग्राम परसदा वेद के तालाब में पर्याप्त जल उपलब्ध था एवं इसका कैचमेंट क्षेत्र विस्तृत पाया गया। रन ऑफ एवं नहर जल के प्रवेश बिंदु पर फ्रैक्चर, फॉल्ट लाइन चिन्हित कर इंजेक्शन वेल हेतु उपयुक्त स्थान चयनित किया गया। इससे तालाब के डाउनस्ट्रीम स्थित पेयजल स्रोतों (ट्यूबवेल) का पुनर्भरण सुनिश्चित होगा, जिससे जल जीवन मिशन अंतर्गत ओएचटी एवं ग्रामीण जल आपूर्ति प्रणाली को स्थायित्व मिलेगा। इस प्रशिक्षण एवं मैदानी अभ्यास से तकनीकी अधिकारियों को स्थानीय भू-जल परिस्थितियों के अनुरूप वैज्ञानिक जल पुनर्भरण तकनीकों की जानकारी प्राप्त हुई। यह पहल ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट के समाधान एवं दीर्घकालिक जल स्रोत स्थायित्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
