समाज निर्माण से पहले स्वयं का चरित्र निर्माण जरूरी है: नारायण दास
आहार, विचार और व्यवहार की शुद्धता पर जोर
नारायण दास महाराज की पत्रकारों से चर्चा
महासमुंद। भगवान शिव अपने परिवार को एक करके रखे हैं, वैसे ही प्रत्येक व्यक्ति को अपने परिवार के प्रति समर्पण का भाव रखते हुए एक सूत्र में बांधना चाहिए। समाज निर्माण से पहले स्वयं का चरित्र निर्माण जरूरी है। भगवान शिव का वाहन नंदी है तो मां दुर्गा पार्वती का वाहन शेर, दोनों एक-दूसरे के विरोधाभास है। मयूर और सर्प, सर्प और चूहा दोनों विरोधाभास होते हुए भी भगवान शिव के प्रति आस्था और समर्पण है, इसलिए सभी एक साथ रह रहे हैं। ऐसा ही व्यवहार और प्रेम भाव परिवार में करना चाहिए। उपरोक्त बातें पत्रकारों से सनातन और अध्यात्म पर चर्चा करते हुए श्री राधे निकुंजधाम जंजगीर चरौदा भिलाई 3 के नारायण दास महाराज ने कही।
वे यहां कबीर बाड़ा में चल रहे श्री शिवपुराण कथा वाचन करने पहुंचे हैं। उन्होंने बताया कि वे पिछले 10 वर्षों से सनातन की सेवा में लगे हैं। उनके निकुंज धाम में अनेक सेवा के प्रकल्प चल रहे हैं। पिछले 5 वर्षों से निर्धन बहन, बेटियों का विवाह तथा रोहणी गौ-धाम में सैकड़ों गायों की सेवा हो रही है। उनका उद्देश्य सनातन का जागरण करना, सामाजिक समरसता, एकता, सम्भाव को लेकर समाज आगे बढ़े यही एक मात्र उद्देश्य है। महाराज ने कहा कि धर्म के प्रति निष्ठा होनी चाहिए। आहार, विचार और व्यवहार की शुद्धता बहुत की जरूरी है। परिवारिक समरसता पर महाराज ने कहा कि हम परिवार को छोड़कर समाज की समरसता पर ध्यान नहीं दे सकते, समाज को आगे बढ़ाना है तो परिवार में भी समन्वय जरूरी है। अपने बड़े बुजुर्गों के प्रति सम्मान और आदर का भाव सदैव रखना चाहिए। अनुभव के आधार पर यदि हम से बड़े कुछ कह दें, तो उसे बुरा मानने के बजाए समझाइश के भाव से लेना चाहिए। पूछे गए सवालों का जवाब देते हुए नारायण दास ने कहा कि बच्चों में संस्कार के लिए धर्म ग्रंथों का अध्ययन जरूरी है, इसके लिए उन्होंने पाठयक्रम में महापुरूषों और अध्यात्म संबंधित विषयों को शामिल करने की वकालत की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सही समय पर विवाह होना चाहिए। विलंब से विवाह होने के कारण भी अनेक विकार समाज में आ रहे हैं इस पर अभिभावकों को ध्यान देना चाहिए।
