सुकमा में छिंदगुड़ निर्माण प्रशिक्षण का सफल समापन
– प्रशिक्षण के दौरान ही बनी बाजार से सीधी कड़ी
सुकमा, 28 जनवरी 2026/कलेक्टर अमित कुमार, सीईओ जिला पंचायत मुकुन्द ठाकुर एवं वनमंडलाधिकारी अक्षय भोसले के नेतृत्व में वन विभाग द्वारा सुकमा जिले में पारंपरिक छिंदगुड़ निर्माण को आजीविका के सशक्त साधन के रूप में विकसित करने की दिशा में आयोजित दो माह का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
प्रशिक्षण हेतु दंतेवाड़ा से एक अनुभवी प्रशिक्षक को दो माह की अवधि के लिए नियुक्त किया गया, जिन्होंने छह गांवों में रहकर गहन एवं व्यवहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया। यह प्रशिक्षण चिंदगढ़ ब्लॉक के लिट्टिरास, साउतनार, कंकपाल एवं कोडरीपाल, सुकमा ब्लॉक के कोर्रा तथा कोंटा ब्लॉक के सामसेट्टी गांव में आयोजित किया गया। प्रशिक्षण की विशेषता यह रही कि प्रशिक्षक ने गांवों में निवास कर स्वयं सभी प्रक्रियाओं का प्रत्यक्ष अभ्यास कराया।
प्रशिक्षण दो चरणों में संचालित किया गया। प्रथम चरण में छिंद के पेड़ों की सफाई, देखरेख एवं रस संग्रहण की तकनीकी जानकारी दी गई, जबकि द्वितीय चरण में चिंद रस से गुणवत्तापूर्ण गुड़ निर्माण की प्रक्रिया सिखाई गई।
इस पहल की एक बड़ी उपलब्धि यह रही कि प्रशिक्षण अवधि के दौरान ही स्थानीय बाजार से जोड़ने के प्रयास किए गए। इसके परिणामस्वरूप जमीनी स्तर पर गुड़ निर्माण करने वाले प्रत्येक प्रतिभागी ने अपने उत्पाद की बिक्री कर आय अर्जित की। प्रशिक्षण अवधि में एक परिवार द्वारा अधिकतम 7 हजार रुपए तक की आय अर्जित की गई, जो इस मॉडल की व्यावहारिक सफलता को दर्शाता है।
प्रशिक्षण के समापन अवसर पर सभी प्रतिभागियों को जिला कलेक्टोरेट कार्यालय में छिंदगुड़ का प्रदर्शन एवं विक्रय किया गया। इसके पश्चात तुंगल बांध में पीपीआईए फेलो अर्कजा कुठियाला द्वारा प्रशिक्षण की समीक्षा बैठक आयोजित की गई, जिसमें प्राप्त सीख, चुनौतियों एवं आगामी कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।
मैदानी स्तर पर प्रशिक्षण के सफल संचालन में एनआरएलएम के पीआरपी अहिल्या, मंजू एवं पत्रिका की महत्वपूर्ण भूमिका रही। साथ ही टीआरआई संगठन से जुड़ी टोंगपाल सीएलएफ की एचआर सदस्य ओमी तथा वन विभाग के रमेश्वर यादव ने समन्वय एवं क्रियान्वयन में अहम सहयोग प्रदान किया।
