पैक्स समितियों को मिला सीएससी किसान ई-स्टोर प्रशिक्षण
किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री मिलेगी सुलभता से
समितियों को और सुदृढ़ बनाकर जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूत करें : कलेक्टर मिश्रा
धमतरी, 04 अगस्त 2025 / कलेक्टर अबिनाश मिश्रा की अध्यक्षता में आज कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में प्राइमरी एग्रीकल्चर क्रेडिट सोसायटी (पैक्स) अंतर्गत जिला सहकारी विकास समिति के कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) किसान ई-स्टोर प्रणाली का प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस पहल का उद्देश्य किसानों को बीज, उर्वरक, कीटनाशक एवं कृषि उपकरण जैसी आवश्यक सामग्री गुणवत्तापूर्ण और उचित दर पर उपलब्ध कराना है।
स्टेट प्रोजेक्टर मैनेजर सुरेंद्र कुमार दास ने प्रशिक्षण के दौरान पावर प्रजेंटेशन के माध्यम से बताया कि किस प्रकार सीएससी किसान ई स्टोर के माध्यम से समितियाँ किसानों को कृषि आदानों की आपूर्ति सुनिश्चित कर सकती हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश में इस प्रशिक्षण की शुरुआत धमतरी से की गई है, जो कि एक सराहनीय पहल है।
प्रशिक्षण में मैनेजर दास ने https://www.csc.gov.in पोर्टल के माध्यम से सीएससी किसान ई-स्टोर के संचालन की तकनीकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समितियाँ किस प्रकार पोर्टल पर लॉगिन कर कृषि संबंधी उत्पादों का पंजीकरण एवं क्रय-विक्रय कर सकती हैं। इस अवसर पर सीएससी जिला प्रबंधक विनय गिरी उपस्थित थे ।
कलेक्टर अबिनाश मिश्रा ने कहा कि पैक्स समितियों को बहुउद्देशीय संस्था के रूप में विकसित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि समितियाँ केवल ऋण वितरण तक सीमित न रहकर कृषि उपकरण, विपणन, बीज एवं उर्वरक वितरण जैसी सेवाएं भी प्रदान करें।
उन्होंने कहा कि पैक्स समितियों के माध्यम से जिले के किसानों को बेहतर सेवाएं प्रदान की जा सकती हैं, जैसे कृषि उपकरणों की आपूर्ति, बीज वितरण, और विपणन सुविधा आदि। उन्होंने कहा कि इन समितियों को सुदृढ़ बनाकर जिले की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और मजबूत किया जा सकता है। इसके लिए समितियों को नवाचार और तकनीकी सहयोग की आवश्यकता की बात कही ।
उन्होंने सभी ब्लॉकों में एक-एक सीएससी को रोल मॉडल के रूप में विकसित करने पर बल देते हुए दो माह बाद भौतिक सत्यापन सहित इसकी समीक्षा करने की बात कही।’
दास ने जानकारी दी कि जिले में 74 सेवा सहकारी समितियाँ पंजीकृत हैं, जिनमें सभी की आईडी बन चुकी है और शत-प्रतिशत संचालन प्रारंभ हो चुका है। अब तक जिले के 1960 किसान ई-स्टोर में पंजीकृत हो चुके हैं, जिससे यह स्पष्ट है कि किसान इस प्रणाली से जुड़कर लाभान्वित हो रहे हैं।
यह पहल जिले में कृषि क्षेत्र को तकनीकी और व्यवस्थित दिशा में आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।