बस्तर पंडुम की शुरुआत, संस्कृति को संवारने सहेजने का ऐतिहासिक अवसर-विधायक

दंतेवाड़ा, 02 अप्रैल 2025। अपनी संस्कृति का पुनर्वलोकन यह संदेश देता है कि हम पूरी निष्ठा और सजगता से अपनी विरासत की जड़ों से जुड़कर उसे नया आयाम देवें। आधुनिक जीवनशैली को स्वीकार करके भी अपनी विरासत को सर्वोपरि रखना ही सही मायने में समाज को एक सूत्र में पिरोता है। इसी लक्ष्य और उद्देश्य के अनुरूप संस्कृति विभाग एवं जिला प्रशासन के तत्वाधान में दो तारीख को संभाग स्तरीय ‘‘बस्तर पंडुम‘‘ की हाई स्कूल मैदान में शुरुआत हुई। उल्लेखनीय है कि ‘‘बस्तर पंडुम‘‘ 2 से 5 तक आयोजित होगा। जिसमें विभिन्न प्रकार के बस्तर संभाग के सभी जिलों की टीमों द्वारा विभिन्न विधाओं की प्रदर्शनी के साथ-साथ देश के अन्य राज्य जैसे ओडिशा, तेलंगाना, असम, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक दल अपनी सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी जाएगीं। कार्यक्रम के शुरुआत में विधायक चैतराम अटामी एवं जनप्रतिनिधियों द्वारा सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर एवं कांकेर जनजातियों द्वारा लगाए गए स्टालों को देखा।
कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए विधायक ने कहा कि ऐतिहासिक ‘‘बस्तर पंडुम‘‘ में गांव-गांव से परंम्परा संस्कृति के प्रदर्शन को ऐतिहासिक अवसर बताते हुए कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के कुशल नेतृत्व में ‘‘बस्तर पंडुम‘‘ का आयोजन किया जा रहा है। जिसमें बस्तर की सभी सांस्कृतिक की धरोहर को संजोने के लिए किया गया है। यह कार्यक्रम एक उत्साह के तरह मनाया जा रहा है। पहले ब्लॉक स्तर पर बस्तर पंडुम बनाया गया। उसके बाद जिला स्तर पर तथा अब संभाग स्तर पर बस्तर पंडुम बनाया जा रहा है। बस्तर पंडुम के माध्यम से पारंपरिक नृत्य, लोकगीत, हस्तशिल्प, और आदिवासी रीति-रिवाजों को एक भव्य मंच प्रदान किया गया है। जिससे स्थानीय संस्कृति को नई पहचान मिलेगी। इस उत्सव में विभिन्न जनजातीय समूह अपनी कला और परंपराओं का प्रदर्शन कर रहे हैं, जिससे न केवल सांस्कृतिक जागरूकता बढ़ेगी बल्कि पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

उन्होंने बस्तर पंडुम की व्याख्या करते हुए कहा कि जनजाति बहुल क्षेत्र में उत्सव मनाने की परपंरा को पंडुम कहा जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में विशेष अवसरों में मनाए जाने वाले इस पर्व को आज हम राज्यष्षासन के मंशानुरूप जिला मुख्यालय में मना रहे है। इसके साथ ही उपस्थित आगन्तुक जनप्रतिनिधियों ने भी बस्तर पंडुम 2025 को ऐतिहासिक क्षण बताते हुए कहा कि इससे देश दुनिया में बस्तर की आदिम संस्कृति को एक नयी पहचान मिलेगी। ज्ञात हो कि हाई स्कूल ग्राउंड में आज प्रारंभ हुए बस्तर पंडुम में संभाग के समस्त जिले सुकमा, बीजापुर, दंतेवाड़ा, बस्तर, कोंडागांव, नारायणपुर एवं कांकेर द्वारा अपने-अपने क्षेत्र के प्रमुख लोक नृत्यों का प्रदर्शन किया जाएगा इसके साथ ही इन जिलों द्वारा अपने स्टालों पर जनजाति पेय पदार्थ एवं व्यंजनों का प्रदर्शन किया जा रहा है। साथ ही खान पान के अलावा वेशभूषा आभूषणों वादय यंत्रों के भी स्टॉल लगाए गए है। कल 3 अप्रैल बस्तर पंडुम में उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा, सहित अन्य राज्य स्तर के मंत्रीगणों का भी आगमन होगा इसके अलावा कल संध्या 6 बजे प्रख्यात कवि एवं राम कथा वाचक कुमार विश्वास द्वारा ’’बस्तर के राम’’ पर आधारित काव्य वाचन करेगें। इस मौके पर जिला पंचायत अध्यक्ष नंदलाल मुड़ामी, जिला पंचायत उपाध्यक्ष अरविंद कुंजाम, जिला पंचायत सदस्य कमला नाग, दंतेवाड़ा नगर पालिका अध्यक्ष श्रीमती पायल गुप्ता, गीदम नगर पालिका अध्यक्ष रंजनीष सुराना, बचेली, किरंदुल, जनपद पंचायत अध्यक्ष श्रीमती सुनीता भास्कर, कटेकल्याण, कुआकोंडा, एवं अन्य जनप्रतिनिधिगण, सर्व समाज प्रमुख सहित जिला पंचायत सीईओ जयंत नाहटा, एसडीएम लोकांष एल्मा सहित अन्य विभागीय अधिकारी कर्मचारी उपस्थित रहे।