अहिल्याबाई ने सनातन समाज के उत्थान के लिए कार्य किया : साधना

कस्तूरबा ट्रस्ट में अहिल्याबाई होल्कर त्रिशताब्दी जन्म समारोह
महासमुंद। भारत के प्रमुख तीर्थ केवल धार्मिक स्थल ही नहीं अपितु शिक्षा, संस्कार व राष्ट्र चेतना के केंद्र थे। आक्रांताओं द्वारा उसका विध्वंस करने का उद्देश्य केवल लूटना ही नहीं था बल्कि भारतीय परंपरा, संस्कार व सांस्कृतिक चेतना का विनाश करना भी था। अहिल्याबाई ने भारत के स्वत्व जागरण के लिए सांस्कृतिक प्रतिष्ठानों का जीर्णोद्धार कराकर सनातन समाज के उत्थान और सांस्कृतिक गौरव को पुनर्प्रतिष्ठित करने का कार्य किया।
उक्त उद्गार नारी शक्ति महिला मंच द्वारा पुण्यश्लोक लोकमाता अहिल्याबाई के त्रिशताब्दी जन्म समारोह पर कस्तूरबा ट्रस्ट बेलसोंडा के कार्यक्रम में मुख्य वक्ता सेवा निवृत्त प्राचार्य डॉ. साधना कसार ने व्यक्त किये। उन्होंने कहा कि “अहिल्याबाई का पूरा जीवन संसार के लिए एक उदाहरण है। अपने लिए तो सभी जी लेते हैं लेकिन जो औरों के लिए जीता है समाज, संस्कृति और राष्ट्र के लिए उदाहरण बनता है। उनका व्यक्तित्व विशिष्ट व विराट है अपनी विशिष्टता के कारण ही जन सामान्य में सम्माननीय बनी। और हमेशा के लिए अमर हो गई।” कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पुण्यश्लोक अहिल्याबाई होलकर समिति के जिला संयोजक सुश्री शशिप्रभा थिटे ने कहा कि “अहिल्या बाई का रहन-सहन व वेशभूषा आडंबरहीन था। पवित्रता, धार्मिकता व सरलता का प्रेरणादायी आभामंडल उनके आसपास छाया रहता था। एक समृद्ध राज्य की महारानी थी। किंतु, उन्होंने सारे सुखों और विलासिता को स्वयं से दूर रखा। निष्काम सेवा व कठोर साधना को ही जीवन में स्थान दिया था। उनका जीवन सरल व सात्विक था। अहिल्याबाई का आदर्श प्रत्येक भूमिका में अनुकरणीय है बेटी, वधू, पत्नी, दूरदर्शी मां, उत्कृष्ट समाज और राष्ट्रसेवी, कुशल सेनापति एवं सशक्त शासक के रूप में वे अद्भुत उदाहरण है।” विशिष्ट अतिथि सुनीता देवदत्त चंद्राकर ने अहिल्याबाई द्वारा अपने ही पुत्र को मृत्युदंड की सजा देने की घटना का स्मरण किया। उपसरपंच हुलसी चंद्राकर ने कहा “द्वारिका, रामेश्वर, बद्रीनाथ, सोमनाथ, अयोध्या, जगन्नाथ पुरी, काशी, गया, मथुरा, हरिद्वार सहित कई प्रसिद्ध स्थानों एवं बड़े मंदिरों का जीर्णोद्धार करवाया। कई धर्मशालाएं एवं अन्न क्षेत्र का निर्माण करवाया। समाजसेवी सुधा साहू ने कहा कि देवी अहिल्याबाई ने विधवाओं को संपत्ति का अधिकार प्रदान किया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के राजिम विभाग के प्रचारक ठाकुर राम ने संघ द्वारा चलाए जा रहे राष्ट्रहित के महाअभियान पंच परिवर्तन की जानकारी दी। कार्यक्रम का प्रारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। शिक्षक उमेश भारती गोस्वामी ने प्रेरक गीत प्रस्तुत किया। संचालन करते हुए डॉ. वाणी तिवारी ने अहिल्याबाई होलकर के व्यक्तित्व एवं कृतित्व के विभिन्न पहलुओं को उजागर करते हुए कहा कि “लोकमाता अहिल्याबाई कुशल योद्धा होने के साथ दूरदृष्टा भी थी। इस अवसर पर कस्तूरबा ट्रस्ट की बालिकाओं द्वारा स्वागत गीत के साथ नृत्य भी प्रस्तुत किया। आभार प्रदर्शन लक्ष्मी कांत तिवारी ने किया। भारत माता की आरती के साथ कार्यक्रम का समापन किया गया। इस अवसर पर प्रीति कर्मकार, राधेश्याम सोनी, चन्दन डड़सेना, भोलाराम चन्द्राकर, मनोज सेन, कीर्ति साहू, अंशु धीवर, हठियारिन धीवर, कृष्णा साहू, रूक्मणी साहू, फूलबाई साहू, चन्द्रिका साहू, किरण धीवर, रामेश्वरी साहू, दीनबती देवांगन, बेवफाई देवांगन, पार्वती धीवर, सुशीला चंद्राकर, बिंदा चंद्राकर, दुलारी चंद्राकर, कुमारी, पिंगला चंद्राकर, कौशल्या चंद्राकर, बृहस्पति धीवर, संतोषी धीवर, चंद्रकला बघेल, सोहागी ध्रुव, नर्मदा धीवर, गंगा साहू, उषा चंद्राकर,रेखा चंद्राकर, आयुषि चंद्राकर, हेमलता चंद्राकर, मनोरमा, अनिता चंद्राकर,तोषण चंद्राकर, कल्पना चंद्राकर, लता चंद्राकर, जमुना चंद्राकर, कमला चंद्राकर सहित नारी शक्ति महिला संगठन के सदस्य , कस्तूरबा ट्रस्ट के बच्चे व ग्राम वासी उपस्थित थे।