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साल बीज की बंपर फसल का लाभ उठाएँ अपनी आय बढ़ाएँ

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कवर्धा। जिले के ऊपर मैकल पर्वत श्रेणी के तलहटी ग्राम चिल्फी, खारा, रेंगाखार आदि में साल वृक्षो का बहुतायत है। इस वर्ष छत्तीसगढ़ शासन ने 65 प्रकार के वनोपजो को न्यूनतम समर्थन मूल्य से संग्रहण करने का निर्णय लिया है। इन वनोपजो को राज्य लघु वनोपज संघ, महिला स्व-सहायता समूहो के माध्यम से वनोपज संग्राहक परिवारों से क्रय किया जा रहा है। प्रत्येक 02 वर्ष के अंतराल पर साल बीज की पैदावार में बढ़ोतरी होती है। इस वर्ष सालबीज की पैदावार बहुत अच्छी है। वन मंडलाधिकारी श्री चूड़ामणि सिंह ने वनोपज संग्राहक परिवारों से अपील करते हुए कहा कि साल बीज का संग्रहण प्रारंभ करने तथा साल बीज को 25 मई से 25 जून 2023 तक अपने ग्राम के निकट हाट बाजार स्तरीय महिला स्व-सहायता समूहो को बिक्री कर सकते है। उन्होंने बताया कि साल बीज को सुखाने के बाद हल्का भूनने के पश्चात उसके पंखिडियो को पृथक कर स्वस्थ, सूखा एवं साफ बीज जिसका रंग पीला भूरा हो एकत्र करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि गुणवत्ता मानक रंग-पीला भूरा होना चाहिए। नमी 10 प्रतिशत से कम, अवाछनीय पदार्थ नही होने चाहिए तथा दाना क्षतिग्रस्त टूटा हुआ न हो तथा उनमें कीट संक्रमण नही होना चाहिए। दर ग्रेड-। नमी 10 प्रतिषत से कम होने पर 20 रूपए प्रतिकिलो, दर ग्रेड-।।नमी 12 प्रतिषत से कम होने पर 18 रूपए प्रतिकिलो होना चाहिए। उन्होंने कि प्रत्येक ग्रामवासी इसका प्रचार-प्रसार करें तथा साल बीज एकत्र कर अपनी आय में वृध्दि करने कहा है।
सदाबहार साल (सरई) वृक्ष प्रकृति की अद्भुत देन है। आकर्षण के कारण अकाल समय में वनवासी साल की छाल चूस कर अपनी प्यास बुझाते थे। अधिकांश नदियो का उद्गम साल तनो से ही हुआ है। साल वृक्ष का कृत्रिम पुर्नउत्पादन लगभग नही के बराबर है। साल वृक्ष को कल्पवृक्ष व देव वृक्ष के नाम से भी जाना जाता है। इसके हरे पत्ते गर्मीयो में और अधिक हरे एवं मन को लुभाने वाले हो जाते है। इस वृक्ष का काष्ठ अत्यंत मजबूत होता है। इसी कारण दरवाजो व खिडकियों के चौखत, छत आदि के निर्माण के लिए इसका उपयोग अनादिकाल से होता आ रहा है। इसके बीज अत्यंत सुंदर, आकर्षक तथा पंख लिए होते है। इसके बीज से तेल निकाल कर चाकलेट, सुगंधित इत्र व साबुन तथा खाद्य पदार्थो के निर्माण मे उपयोग किया जाता है।

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