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नई वाहन नीति: पुरानी कार को स्क्रैप कर नई खरीदी तो पंजीकरण शुल्क नहीं, रोड टैक्स भी 25 फीसदी कम

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यदि आपकी कार सड़कों पर दौड़ते-दौड़ते 15 साल की आयु सीमा को पार कर चुकी हो तो अब उसे स्क्रैप यानी कबाड़ करने के बदले सरकार तोहफों की झड़ी लगाएगी। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने गुरुवार को संसद में बताया कि पुराने वाहन को स्क्रैप करने के बाद नया वाहन खरीदने वाले को पंजीकरण शुल्क नहीं चुकाना होगा।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने संसद में किया ऐलान, कंपनियां देंगी स्क्रैप सर्टिफिकेट देने पर एक्स शोरूम कीमत पर 5 फीसदी छूट
केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्री गडकरी का लिखित बयान संसद के दोनों सदनों के पटल पर पेश किया गया। इसमें उन्होंने कहा कि नई स्वैच्छिक वाहन कबाड़ नीति में स्क्रैप सर्टिफिकेट दिखाने पर नए वाहन से 25 फीसदी कम रोड टैक्स वसूलने के साथ ही ऑटोमोबाइल कंपनियों से भी एक्स शोरूम कीमत पर 5 फीसदी छूट दिलाने का प्रावधान किया जा रहा है।

इसके लिए केंद्रीय सड़क परिवहन व राजमार्ग मंत्रालय सभी राज्यों और वाहन निर्माताओं को एडवाइजरी जारी करेगा। बता दें कि इस नीति की घोषणा इस बार केंद्रीय बजट में की गई थी।
केंद्रीय एमएसएमई मंत्री गडकरी ने कहा, नई नीति का ड्राफ्ट अगले कुछ सप्ताह में सभी हितधारकों के सुझाव व आपत्तियां लेने के लिए जारी कर दिया जाएगा। वाहनों को कबाड़ करने वालों को कई तरह से लाभ मिलेगा। पुराने वाहन को कबाड़ करने के लिए सिंगल विंडो रजिस्ट्रेशन सिस्टम बनाया जाएगा। उन्हें स्क्रैपिंग सेंटर पर स्क्रैप सर्टिफिकेट के अलावा पुराने वाहन की कीमत भी मिलेगी, जो नए वाहन की एक्स शोरूम कीमत के 4 से 6 फीसदी तक होगी।

अगले दो साल में पीपीपी मोड में ऐसे 100 स्क्रैपिंग सेंटर बनाए जाने की योजना है। निजी वाहनों के अलावा बस-ट्रक जैसे व्यवसायिक वाहनों के भी रोड टैक्स में 15 फीसदी की छूट दी जाएगी। उन्होंने कहा, कोई भी वाहन फिटनेस टेस्ट में फेल होने या पंजीकरण का नवीकरण नहीं करा पाने पर खत्म माना जाएगा।

गडकरी के मुताबिक, देश में इस समय 51 लाख मोटर वाहन 20 साल से ज्यादा पुराने हैं, जबकि 34 लाख अन्य हल्के वाहन 15 साल की आयु सीमा पार कर चुके हैं। अपनी 15 साल की उम्र पार करने के बाद बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के दौड़ने वाले मध्यम व भारी व्यवसायिक वाहनों की संख्या करीब 17 लाख आंकी गई है। इस हिसाब से देश में करीब एक करोड़ वाहन नई नीति के बाद सड़कों से हट सकते हैं।

यह भी होंगे प्रावधान
15 साल बाद खुद ही गैर पंजीकृत हो जाएगा व्यवसायिक वाहन
20 साल होगी निजी वाहनों का पंजीकरण खत्म होने की अवधि
02 गुना होगी 15 साल बाद पुन: पंजीकरण कराने के लिए फीस

चार चरण में होगा लागू
01 अक्तूबर, 2021 से प्रयोग के तौर पर लागू हो जाएंगे फिटनेस टेस्ट व स्क्रैपिंग सेंटर नियम
01 अप्रैल, 2022 से सरकारी विभागों व कंपनियों के 15 साल पुराने वाहन किए जाएंगे कबाड़
01 अप्रैल, 2023 से सभी भारी वाहनाें के लिए फिटनेस टेस्ट को कर दिया जाएगा अनिवार्य
01 जून, 2024 से अन्य सभी श्रेणी के वाहनों के लिए भी चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे नियम

हर तरह से ‘बल्ले-बल्ले’
गडकरी ने कहा कि ‘वालंटियरी व्हीकल-फ्लीट मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम’ या वाहन कबाड़ नीति हर तरह से ‘बल्ले-बल्ले’ का अहसास देने वाली होगी। एकतरफ इससे ईंधन क्षमता बढ़ेगी व वायु प्रदूषण घटेगा, वहीं दूसरी तरफ सरकार का जीएसटी राजस्व भी करीब 40 हजार करोड़ रुपये बढ़ेगा। उन्होंने कहा, ऑटोमोबाइल उद्योग का सालाना टर्नओवर भी मौजूदा 4.5 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 10 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

साथ ही देश में जगह-जगह चल रहे अवैध कबाड़ी बाजारों की जगह योजनाबद्ध स्क्रैप उद्योग की शुरुआत होगी। इससे करीब 35 हजार नए रोजगार भी सृजित होंगे। इस नीति को कोविड-19 महामारी के बुरे प्रभाव से जूझ रहे भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग को बढ़ावा देने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

कबाड़ से घटेंगे बाजार में वस्तुओं के दाम
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वाहनों के कबाड़ से बड़े पैमाने पर निकलने वाले प्लास्टिक, तांबा, एल्युमीनियम, स्टील व रबर को रिसाइकिल किया जा सकेगा। इससे ऑटोमोटिव, स्टील व इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योगों के लिए कम कीमत में रॉ मैटीरियल उपलब्ध होगा। इसका असर बाजार में बहुत सारी वस्तुओं के दामों में कमी के तौर पर दिखेगा।

नई नीति का उद्देश्य
– सड़कों से पुराने और खराब वाहनों को हटाना
– 10 से 12 फीसदी ज्यादा प्रदूषण फैलाते हैं पुराने वाहन
– धुएं से हवा में फैलने वाले ऐसे प्रदूषक तत्वों को घटाना
– सड़क और वाहन सुरक्षा पहलू में सुधार करना

स्क्रैपिंग सेंटरों पर पर्यावरण का विशेष ध्यान
गडकरी ने कहा कि स्क्रैपिंग सेंटरों को पुराने वाहन कबाड़ करते समय पर्यावरणीय व प्रदूषण से जुड़े सभी मानकों व कानूनों का सख्ती से पालन करना होगा। ऐसे सेंटरों पर पर्याप्त पार्किंग सुविधा के अलावा हवा, पानी व ध्वनि प्रदूषण को रोकने वाले उपकरण लगाने होंगे। साथ ही वाहनों के कबाड़ से निकलने वाले हानिकारक कूड़े का प्रबंध करने और उसे ठिकाने लगाने की भी उचित सुविधा तैयार करनी होगी।

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