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प्रधानमंत्री ने ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ समारोह की शुरुआत की, पदयात्रा को दिखाई हरी झंडी

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अहमदाबाद. प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की स्वतंत्रता की 75वीं वर्षगांठ को सर्मिपत ‘‘आजादी का अमृत महोत्सव’’ समारोह की शुक्रवार को शुरुआत की. मोदी ने बताया कि 75वीं वर्षगांठ का समारोह 15 अगस्त 2023 तक चलेगा. उन्होंने कहा कि बीते छह वर्ष में देश के गुमनाम नायकों के इतिहास को संरक्षित करने के ‘सजग प्रयास’ किए गए हैं.

प्रधानमंत्री ने महात्मा गांधी की दांडी यात्रा का स्मरण करते हुए गुजरात के साबरमती आश्रम से पदयात्रा को हरी झंडी दिखाई. अहमदाबाद के साबरमती आश्रम से 81 लोगों ने पदयात्रा शुरू की. वे 386 किमी दूर नवसारी के दांडी तक जाएंगे. 25 दिन की इस पदयात्रा का समापन पांच अप्रैल को होगा.

महात्मा गांधी के नेतृत्व में ‘नमक सत्याग्रह’ की घोषणा करते हुए 78 लोगों ने 12 मार्च 1930 से दांडी यात्रा शुरू की थी. नमक पर अंग्रेजों के दमनकारी ‘कर’ के खिलाफ यह राष्ट्रपिता का अंिहसक विरोध था जिसकी भारत की आजादी के आंदोलन में अहम भूमिका रही.

समारोह की शुरुआत करने के बाद मोदी ने कहा, ‘‘हमें अपने संविधान और लोकतांत्रिक परंपराओं पर गर्व है. भारत लोकतंत्र की जननी है और हम इसे मजबूत करते हुए आगे बढ़ रहे हैं. भारत की उपलब्धियां केवल हमारी अपनी नहीं हैं, बल्कि हमारी उपलब्धियां पूरे विश्व को प्रकाश दिखा रही है.’’ उन्होंने कहा कि विकास के प्रति भारत का ‘आत्मनिर्भर’ रूख विश्व के विकास की यात्रा को बल देगा.

मोदी ने कहा, ‘‘पांच स्तंभ हैं: स्वतंत्रता संग्राम, 75 में विचार, 75 में उपलब्धियां, 75 में कार्य, 75 में संकल्प. ये पांचों स्तम्भ आजादी की लड़ाई के साथ साथ आजाद भारत के सपनों और कर्तव्यों को देश के सामने रखकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देंगे.’’

स्वतंत्रता संग्राम में स्वतंत्रता सेनानियों के विभिन्न योगदान का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘देश इतिहास के इस गौरव को सहेजने के लिए पिछले छह वर्षों से सजग प्रयास कर रहा है. हर राज्य, क्षेत्र में इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं. दांडी यात्रा से जुड़े स्थल का पुनरुद्धार देश ने दो साल पहले ही पूरा किया था. मुझे खुद इस अवसर पर दांडी जाने का मौका मिला था.’’

उन्होंने आगे कहा, ‘‘अंडमान में जहां नेताजी सुभाष ने देश की पहली आजÞाद सरकार बनाकर तिरंगा फहराया था, देश ने उस विस्मृत इतिहास को भी भव्य आकार दिया है. अंडमान निकोबार के द्वीपों को स्वतन्त्रता संग्राम के नामों पर रखा गया है. जलियाँवाला बाग का स्मारक हो या फिर पाइक आंदोलन की स्मृति में स्मारक, सभी पर काम हुआ है. बाबा साहेब से जुड़े जो स्थान दशकों से भूले बिसरे पड़े थे, उनका भी विकास देश ने पंचतीर्थ के रूप में किया है.’’

अहमदाबाद हवाईअड्डे पर उतरने के बाद प्रधानमंत्री सड़क मार्ग से साबरमती आश्रम पहुंचे जहां उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को पुष्पांजलि अर्पित की. वह आश्रम में स्थित आवास हृदयकुंज भी गए जहां गांधी 1918 से 1930 तक अपनी पत्नी कस्तूरबा के साथ रहे थे. मोदी ने आगंतुक पुस्तिका में लिखा कि यह महोत्सव हमारे स्वतंत्रता संग्राम और स्वतंत्रता सेनानियों के प्रति श्रद्धांजलि है.

उन्होंने आगे लिखा, ‘‘साबरमती आश्रम आकर और बापू की प्रेरणा से राष्ट्र निर्माण का मेरा दृढ़ निश्चय और भी मजबूत हुआ है.’’ प्रधानमंत्री ने लिखा, ‘‘महात्मा गांधी ने आत्म निर्भरता और आत्म विश्वास का संदेश यहीं से दिया था.’’

उन्होंने लिखा कि आजादी का अमृत महोत्सव हमारे लोगों द्वारा हमारे स्वतंत्रता सेनानियों और स्वाधीनता संग्राम को श्रद्धांजलि है. इस समारोह के दौरान देश आजादी की लड़ाई के समय की न केवल सभी महत्वपूर्ण उपलब्धियों और महत्वपूर्ण कालखंड को याद करेगा बल्कि हमारे भविष्य के विकास के लिए नई ऊर्जा भी प्राप्त करेगा.

उन्होंने कहा, ‘‘मुझे विश्वास है कि बापू के आर्शीवाद से हम भारतीय अपने कर्तव्यों का पालन करेंगे और इस अमृत महोत्सव के दौरान तय किए लक्ष्यों को भी प्राप्त करेंगे.’’ इसके बाद मोदी आश्रम के निकट स्थित सांस्कृतिक कार्यक्रम स्थल पर गए.

कार्यक्रम की शुरुआत से पहले मोदी ने ट्वीट किया था, ‘‘आज साबरमती आश्रम से अमृत महोत्सव आरंभ हो रहा है, यहीं से दांडी मार्च की भी शुरुआत हुई थी. भारतीय लोगों में आत्मनिर्भरता तथा गौरव के भाव को बढ़ाने में मार्च की अहम भूमिका रही है. स्वदेशी के लिए मुखर होना (वोकलफॉरलोकल) बापू तथा हमारे महान स्वतंत्रता सेनानियों के लिए शानदार श्रद्धांजलि है.’’

मोदी ने लिखा, ‘‘किसी भी स्थानीय उत्पाद को खरीदें और हैशटैग वोकलफॉरलोकल का इस्तेमाल करते हुए सोशल मीडिया पर तस्वीर डालें. साबरमती आश्रम में मगन निवास के निकट एक चरखा लगाया जाएगा. आत्मनिर्भरता से जुड़े हर एक ट्वीट पर यह पूरा घूमेगा. यह जन अभियान का उत्प्रेरक बनेगा.’’

इस समारोह से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों की योजना और नीतियां बनाने के लिए केंद्र सरकार ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है. गुजरात के राज्यपाल आचार्यदेवव्रत तथा मुख्यमंत्री विजय रूपाणी भी इस दौरान मौजूद थे.

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