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हिरन मौत मामला : पुलिस अधिकारी सचिन वाजे ने अग्रिम जमानत याचिका दायर की

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मुंबई. मनसुख हिरन की मौत के मामले में विवादों में घिरे पुलिस अधिकारी सचिन वाजे ने ठाणे की अदालत में शुक्रवार को अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की है. वाजे ने याचिका में कहा है कि हिरन की मौत के संबंध में महाराष्ट्र आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) द्वारा दर्ज की गई प्राथमिकी में किसी व्यक्ति के नाम का उल्लेख नहीं है. वाजे ने प्राथमिकी को ‘‘निराधार और उद्देश्यविहीन’’ बताया और कहा कि उन्हें बलि का बकरा बनाया जा रहा है. उन्होंने दावा किया कि जब हिरन लापता थे और उनकी मौत होने की बात कही जा रही थी, तब वह (वाजे) दक्षिणी मुंबई के डोंगरी इलाके में थे. वाजे के वकील ए एम कालेकर ने शुक्रवार को अदालत से उनके मुविक्कल को गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण देने का अनुरोध किया.

लेकिन अतिरिक्त सरकारी वकील विवेक काडू ने इस अनुरोध का विरोध किया और दलील दी कि इस मामले में जांच अहम पड़ाव पर है. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश एस एस ताम्बे ने वाजे को अंतरिम संरक्षण देने से इनकार किया है. अदालत ने याचिका पर सुनवाई की अगली तारीख 19 मार्च तय की है और जांच अधिकारी को जवाबी हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. वाजे ने दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा-438 के तहत ठाणे के जिला सत्र न्यायालय में याचिका दायर की है. इस धारा के तहत कोई भी व्यक्ति किसी मामले में गिरफ्तारी की आशंका होने पर अग्रिम जमानत का अनुरोध कर सकता है. याचिका में वाजे ने कहा कि हिरन की पत्नी की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत खोखले शक पर आधारित है और निराधार है.

याचिका में कहा गया, ‘‘अपराध के संबंध में प्राथमिक सूचना देने वाले व्यक्ति के खोखले शक के आधार पर किसी नागरिक की गिरफ्तारी को जायज नहीं ठहराया जा सकता.’’ उल्लेखनीय है कि हिरन की पत्नी ने वाजे पर उनके पति की संदिग्ध मौत में संलिप्त होने का आरोप लगाया है. वाजे को बुधवार को मुंबई अपराध शाखा से हटा दिया गया था. वाजे की याचिका में कहा गया है कि उनके विरूद्ध अभियोजनयोग्य साक्ष्य नहीं है और इस मामले में उन्हें आरोपी के रूप में नामजद भी नहीं किया गया है. याचिका में कहा गया है, ‘‘आवेदनकर्ता (वाजे) ठाणे में लंबे समय से रह रहा है. वह मृतक का ग्राहक या परिचित होता तब भी केवल प्राथमिकी के आधार पर उसका मकसद सिद्ध नहीं किया जा सकता.’’ मामले की जांच कर रही एटीएस ने इस सप्ताह की शुरुआत में वाजे का बयान दर्ज किया.

वाजे ने याचिका में कहा कि आठ मार्च को एटीएस के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनसे सघन पूछताछ की और उन्होंने उन्हें बताया कि प्रासंगिक समय (जब हिरन की कथित रूप से हत्या की गयी) के दौरान वह दक्षिण मुम्बई में थे.याचिका में कहा गया, ‘‘चार मार्च को पूरे दिन आवेदनकर्ता दक्षिण मुंबई में था. इसके बाद चार और पांच मार्च की दरम्यानी रात को आवेदनकर्ता को डोंगरी क्षेत्र में देखा गया. यह डोंगरी थाने की स्टेशन डायरी में दर्ज है जिससे कथित तथ्य का सत्यापन होता है.’ अपराध शाखा में सहायक पुलिस निरीक्षक रहे वाजे का तबादला मुंबई पुलिस के नागरिक सुविधा केंद्र शाखा में किया गया है.

गौरतलब है कि उद्योगपति मुकेश अंबानी के दक्षिण मुंबई स्थित आवास के पास 25 फरवरी को विस्फोटक और धमकी भरे पत्र के साथ स्कॉर्पियो एसयूवी कार मिली थी. हिरन ने दावा किया था कि कार उनकी है लेकिन घटना से एक हफ्ते पहले वह चोरी हो गई थी. इस मामले में उस समय पेंच आया जब हिरन पांच मार्च को ठाणे में एक नदी किनारे मृत पाए गए थे. हिरन की पत्नी ने दावा किया कि उनके पति ने एसयूवी पिछले साल नवंबर में वाजे को दी थी और उन्होंने फरवरी के पहले हफ्ते में यह कार लौटाई थी. हालांकि, वाजे ने इससे इनकार किया है.

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