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राहुल का ट्वीट: भारत नहीं रहा लोकतांत्रिक देश, स्वीडन की रिपोर्ट का दिया हवाला

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नयी दिल्ली. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने विवादित बयान दिया है. उन्होंने कहा कि भारत लोकतांत्रिक देश नहीं रहा है. यह बात उन्होंने स्वीडन के एक मीडिया संस्थान की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कही.  राहुल गांधी ने डेमोक्रेसी के बारे में स्वीडन के एक मीडिया संस्थान की रिपोर्ट का जिक्र किया. इसमें भारत में लोकतंत्र के दर्जे को घटाकर इलेक्टोरल ऑटोक्रेसी ‘चुनावी एकतंत्रता’ या चुनावी निरंकुशता कर दिया है. 
 
राहुल गांधी ने गुरुवार को अपने ट्वीट के साथ एक फोटो भी साझा किया. इसमें लिखा हुआ है कि पाकिस्तान की तरह अब भारत भी निरंकुश देश है. 

फ्रीडम हाउस ने भी घटाया था दर्जा, भारत ने की थी कड़ी आलोचना
इससे पिछले सप्ताह भारत ने अमेरिकी वॉचडॉग ‘फ्रीडम हाउस’ की रिपोर्ट पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की थी, जिसमें भी भारत के लोकतांत्रिक दर्जे को घटाया गया था.  इस अमेरिकी संस्था ने भारत में लोकतंत्र व मुक्त समाज के दर्जे को घटाकर आंशिक रूप से मुक्त करार दिया था. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा था कि अमेरिकी संस्था का राजनीतिक फैसला अनुचित है.

उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी का हवाला देकर कहा कि भारत जिस ढंग से इससे निपटा है, उसकी चहुंओर तारीफ हो रही है. भारत की संक्रमण दर व मृत्यु दर बहुत कम है.  फ्रीडम हाउस ने अपनी रिपोर्ट के कवर पेज पर भारत का गलत नक्शा प्रकाशित किया. इसे लेकर भी उसकी आलोचना हुई थी. यह अमेरिकी सरकार द्वारा वित्त पोषित संस्था है. 

मैला ढोने रोधी कानून के क्रियान्वयन में बुरी तरह विफल रही सरकार: राहुल
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने सीवर टैंक की सफाई के दौरान सफाईर्किमयों की मौत से जुड़ा आंकड़ा राज्यसभा में सरकार की ओर से पेश किए जाने के बाद बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि केंद्र सरकार 2013 में बने मैला ढोने रोधी कानून का क्रियान्वयन करने में बुरी तरह विफल रही.

उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘ यह दिखाता है कि सरकार मैला ढोने विरोधी कानून-2013 को लागू करने में बुरी तरह विफल रही.’’ कांग्रेस नेता ने कहा, ‘‘यह सुनिश्चित करने के लिए अतिसक्रिय कदम उठाने की जरूरत है कि हमारे नागरिकों और हमारी सामूहिक राष्ट्रीय अंतरात्मा का अब आगे अपमान नहीं हो.’’

गौरतलब है कि सरकार ने बुधवार को बताया कि 2015 से 2019 के बीच देश में सीवर टैंक की हाथ से सफाई करने के दौरान 389 लोगों की मौत हो गयी. सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने एक प्रश्न के लिखित उत्तर में राज्यसभा को यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि सीवर और सेप्टिक टैंक की खतरनाक ढंग से सफाई करने के कारण हुई इन मौतों को लेकर 266 लोगों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है.

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