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सरकार संवेदनशीलता दिखाए और किसानों एवं महंगाई के मुद्दे पर संसद में चर्चा कराए: कांग्रेस

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नयी दिल्ली. कांग्रेस ने सरकार पर किसानों एवं महंगाई के मुद्दों पर संसद में चर्चा से भागने का आरोप लगाते हुए बुधवार को कहा कि सरकार को संवेदनशीलता दिखाते हुए चर्चा के लिए तैयार होना चाहिए.

राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष और पार्टी के वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने यह भी कहा कि विपक्ष सदन में नियम 267 के तहत चर्चा चाहता था ताकि सरकार से पेट्रोलियम उत्पादों पर उत्पाद शुल्क बढ़ाकर साढ़े छह साल में वसूले गए 21 लाख करोड़ रुपये का हिसाब मांगा जा सके.

उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘‘सरकार उत्पाद शुल्क बढ़ाती जा रही है. भारत के इतिहास में इतना महंगा पेट्रोल और डीजल कभी नहीं बिका. हमने बहुत कोशिश कि नियम 267 के तहत इस विषय को उठाकर सदन में विस्तृत् चर्चा हो, लेकिन सरकार ने चर्चा करने के लिए मौका नहीं दिया.’’

खड़गे ने दावा किया, ‘‘उज्ज्वला योजना के तहत एलपीजी सिलेंडर बांटे गए, लेकिन अब लोगों के पास सिलेंडर में गैस भराने के लिए पैसे नहीं है. पेट्रोलियम उत्पादों का दाम बढ़ने से गरीबों और मध्यम वर्ग पर मार पड़ी है. उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बड़े फैसलों से देश की अर्थव्यवस्था कमजोर हुयी है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता आनंद शर्मा ने कहा, ‘‘ सरकार भारतीय अर्थव्यवस्था के कुप्रबंधन के लिए जिम्मेदार है. विपक्ष को संसद में मुद्दे उठाने के उसके अधिकार को वंचित किया जा रहा है. हमें सवाल पूछने का अधिकार है.’’ उन्होंने कहा, ‘‘सरकार को अपना रुख बदलना चाहिए और विपक्षी दलों के लोगों को मुद्दे उठाने का मौका दिया जाना चाहिए ताकि लोगों को विश्वास हो सके कि संसद के भीतर उनके मुद्दे उठाए जा रहे हैं.’’

कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने सवाल किया, ‘क्या किसानों की स्थिति पर संसद मूक बनी रह सकती है? क्या सरकार किसानों को उनके हाल पर छोड़कर चुनाव में व्यस्त हो जाएगी?’’ उन्होंने कहा, ‘‘300 से अधिक किसानों की मौत हो गई, लेकिन इस सरकार के किसी व्यक्ति ने संवेदना का एक शब्द नहीं बोला. ये किसान हमारे अपने लोग हैं. इनके साथ हमें खड़ा होना होगा.’’

किसानों को पीछे हटाना असंभव, तीनों कानून वापस लेने होंगे: राहुल
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को कहा कि तीनों केंद्रीय कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे किसानों को पीछे हटाना असंभव है और सरकार को ये कानून वापस लेने ही होंगे. उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘अन्नदाता का बारिश से नाता पुराना, ना डरते ना करते मौसम का बहाना, तो क्रूर सरकार को फिर से बताना, असंभव किसानों को पीछे हटाना, तीनों कÞानूनों को पड़ेगा लौटाना!’’

उल्लेखनीय है कि पिछले कुछ महीनों से दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर कई किसान संगठन प्रदर्शन कर रहे हैं. उनकी मांग तीन नये कृषि कानूनों को वापस लेने और न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी वाला कानून बनाने की है. दूसरी तरफ, सरकार ने तीनों कानूनों को कृषि सुधारों की दिशा में बड़ा कदम करार देते हुए कहा है कि इससे किसानों को लाभ होगा और उनकी उपज बेचने के लिए उनके पास कई विकल्प होंगे.

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